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मंदसौर में अंग्रेजी हुकूमत की कलेक्टरी...!

News Published By Mr.Dinesh Nalwaya
Publish Date: 18-07-2024

पुष्पेंद्र वैद्य

आजादी के 75 बरस बीत गए पर देश में अंग्रेजी हुकूमत वाली कलेक्टरी अब भी जिंदा है। ब्रिटिश शासनकाल में राजस्व की उगाही करने वाले को कलेक्टर का नाम दिया गया था। लेकिन मौजूदा वक्त में कलेक्टर साढ़े चार अक्षरों वाला एक ऐसा शब्द है जो ब्रिटिश हुकूमत का डंका आज भी बजाए हुए हैं। ब्रिटिश हुकूमत, जो आम और ख़ास में फर्क के लिए विशेष रूप से जानी जाती रही। मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में कलेक्टर साहब का सदियों पुराना वही रुतबा और वही तेवर देखने को मिल जाते हैं। अपनी शानो-शौकत और तीखे तेवरों के साथ जिले के आम आदमी से ख़ास दूरी बना कर खुद को सुपिरियर जताएँगे तभी तो साहब कहलाएँगे। कुछ तो ट्रेनिंग का हिस्सा और कुछ करेला नीम चढा वाली कहावत साबित होने लगती है। आज मंदसौर के कलेक्टोरेट में धरती पर लौट लगाकर अपनी दरख्वास्त लिए पहुँचे एक किसान की तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। याद आया कि जब कुछ दिन पहले मंदसौर गया तो कलेक्टोरेट के चर्चे कुछ यूँ ही कान पर पड़ गए थे। आज तस्वीरें देखकर लगा कभी-कभी सुनी-सुनाई बातें भी सच हो जाती हैं। कलेक्टर साहब अपने ख़ास कलेक्टरी रुबाब के लिए इलाके में पहचाने जाते हैं। वे लोगों से आसानी से मिलते नहीं, ऐसा परसेप्शन है। सुटेड-बुटेड साहब को मेली कुचैली जनता से खासा परहेज जान पड़ता है। अपने केबिन में क्रिज़बंद अफ़सरों की ही एंट्री है, ऐसा कहा जाता है। जनता से खड़े-खडे बाहर ही मुलाकात कर टरका दिए जाने जैसी बातें आम हैं। भाई, आम लोगों से आसानी से मुलाकात ना हो तभी तो आम और खास में अंतर हो पाएगा ना !! आखिर कलेक्टर साहब ऐसी दूरी नहीं बनाएँगे तो फिर आईएएस और गरीब जनता में भला फर्क कैसे पता चल पाएगा। यह वही जिला है जहाँ किसानों पर गोली चलाई गई थी। तत्कालीन कलेक्टर को सड़क पर जनता ने तमाचे जड़े थे। आज फिर एक किसान हाथ जोड़कर लौट लगाते हुए कलेक्टर साहब के केबिन की तरफ आगे बढ़ता दिखाई दिया। साहब, ये प्रजातंत्र है !! आप भले ही सफाई देते हुए वीडियो जारी कर अपनी बात रख दें मगर यह अंग्रेजों का ज़माना नहीं आजाद भारत की तस्वीर है साहब !!
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